Friday, 13 July 2012

Engg. Sridharan Sahab ji ki panch mul mantra

[राम बालक राय ]13 जुलाई 2012 .

श्रीधरन की सफलता के पांच मंत्र

मेट्रो मैन के नाम से मशहूर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपारेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक ई़. श्रीधरन ने इस धारणा को बदल कर रख दिया कि भारत में परियोजनाएं सही समय पर पूरी नहीं हो सकतीं। उनके प्रेरणादायी नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो का 65 किलोमीटर के विस्तार वाला पहला फेज अपने तय समय से पहले केवल दो साल और नौ माह में पूरा हो गया। यह तो काफी बाद की बात है। आज से करीब चार दशक पहले ही उन्होंने छह महीने के प्रोजेक्ट को सिर्फ डेढ़ महीने में पूरा कर संकेत दे दिया था कि आने वाले समय में वह भारत के गौरव साबित होंगे। काकीनाडा गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले श्रीधरन का जन्म केरल के पलक्कड़ में 12 जून 1932 को हुआ था। दिल्ली मेट्रो के पहले उन्होंने कोंकण रेलवे जैसी कठिन और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा भारत के पहले मेट्रो प्रोजेक्ट कोलकाता मेट्रो के निर्माण में भी उनकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण थी। अपनी अमूल्य सेवाओं के लिए श्रीधरन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। 1963 में उन्हें ‘रेल मंत्री अवॉर्ड’ दिया गया तो 2003 में ‘टाइम मैगजीन’ ने उन्हें ‘वन ऑफ एशियाज हीरोज’ के खिताब से नवाजा। फ्रांस सरकार ने उन्हें 2005 में ‘नाइट ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया, वहीं भारत सरकार ने उन्हें 2001 में ‘पद्मश्री’ तथा 2008 में दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ प्रदान किया। श्रीधरन ने सरकार से कई बार रिटायरमेंट देने के लिए आग्रह किया, लेकिन सरकार उन जैसे ‘जीनियस’ की सेवाओं से महरूम नहीं होना चाहती थी, लिहाजा उनकी रिटायरमेंट टलती रही। लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए सरकार ने उनके रिटायरमेंट को स्वीकृति दे दी है और वह 31 दिसंबर 2011 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आइए निगाह डालते हैं उनकी सफलता के सूत्रों पर- 

समय की पाबंदी
समय की पाबंदी यानी पंक्चुएलिटी का ई़. श्रीधरन से बढ़ कर दूसरा उदाहरण खोजना नामुमकिन नहीं तो नामुमकिन जैसा जरूर है। 1963 में आए एक तूफान ने रामेश्वरम् को तमिलनाडु के मुख्य भू-भाग से जोड़ने वाले ‘पंबन ब्रिज’ को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। रेलवे ने उसकी मरम्मत के लिए छह महीने का लक्ष्य रखा, जिसे श्रीधरन के तत्कालीन बॉस (जिनके अधिकार क्षेत्र के अंदर यह ब्रिज आता था) ने घटा कर तीन महीने कर दिया और इसका जिम्मा श्रीधरन को सौंपा, जिन्होंने केवल 46 दिन में ही यह काम पूरा कर दिया। उनका मानना है कि किसी भी काम में सफल होने के लिए पंक्चुएलिटी बहुत जरूरी है। यही वजह है कि उनके नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो के अब तक के सभी फेज तय समयसीमा और बजट में पूरे किए गए हैं।

ईमानदारी
श्रीधरन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है उनकी ईमानदारी। उनका मानना है कि काम केवल समय पर पूरा होना ही काफी नहीं है, बल्कि वह स्तरीय भी होना चाहिए और इसके लिए ईमानदारी बहुत जरूरी है, तभी पूर्ण रूप से सफलता मिलेगी। वह कहते हैं, ‘हम पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के मामले में कभी समझौता नहीं करते।’

पेशेवर योग्यताश्रीधरन काम करने वालों की पेशेवर योग्यता को लेकर कोई समझौता नहीं करते, लिहाजा उनके द्वारा हाथ में लिया गया कोई भी प्रोजेक्ट असफल या कम गुणवत्ता वाला साबित नहीं हुआ। जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो के निर्माण कार्य में लगे लोगों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए विदेश भी भेजा, क्योंकि उनका मानना है कि किसी भी काम की सफलता अंतत: उसे करने वाले लोगों की योग्यता पर ही निर्भर करती है।

स्पष्ट सोच और दृष्टि
कोई भी काम तभी सफल होता है, जब उसे करने वाले के पास एक स्पष्ट सोच और दृष्टि होती है। दुनिया के महान लोगों की सफलता में इस तथ्य को तलाशा जा सकता है। श्रीधरन भी इस बात को पूरी शिद्दत के साथ मानते और अनुसरण करते हैं। वह कहते हैं, ‘लोगों को कष्ट दिए बगैर तय समय और बजट में काम पूरा करने के लिए विजन और स्पष्ट ऑब्जेक्टिव होना बहुत जरूरी है। इसके बगैर सफलता की कल्पना नहीं की जा सकती।

सभी घटकों की भागीदारीश्रीधरन का कहना है, ‘हम इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि केवल सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही काफी नहीं है। पारदर्शिता, कार्यक्षमता, जवाबदेही, सर्विस-ओरिएंटेशन और सभी घटकों की सहभागिता भी उतनी ही महवपूर्ण है।’ इस बात को वह सिर्फ कहते ही नहीं, अमल में भी लाते हैं। उन्होंने अब तक के अपने सभी प्रोजेक्टों में उससे जुड़े सभी पक्षों की सहभागिता को सुनिश्चित किया है और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया है। यह भी उनकी कामयाबी का एक महत्त्वपूर्ण सूत्र है।

Narayan Murty ji ki aatmakatha.

#7.2 मैं एक साधारण इंसान हूं: नारायण मूर्ति

नारायण मूर्ति
मैं एक साधारण इंसान हूं: नारायण मूर्ति  और भी... 

इंफोसिस के चेयरमैन एन आर नारायण मूर्ति ने कंपनी के शेयरधारकों की वार्षिक सभा में अपना आखिरी भाषण दिया और अपने को एक सामान्य आदमी बताया.
वर्षों तक देश की इस दूसरी सबसे बड़ी साफ्वेयर सेवा निर्यातक कंपनी का नेतृत्व करने वाले मूर्ति ने अब अवकाश ले लिया है. उन्होंने कहा कि वह ‘बहुत से मामलों में औसत से कम योग्यता के’ एक साधारण इंसान है. मूर्ति ने कहा कि उनके जैसे व्यक्ति की सफलता से उन सामान्य लोगों को उत्साहित होना चाहिए जो दुनिया में कुछ कर दिखाना चाहते हैं.
इंफोसिस के संस्थापक सदस्य और मुख्य संरक्षक नारायण मूर्ति ने कहा कि अपनी पारी समाप्त करते हुए मैं देश और दुनिया में के लिए जो कुछ भी कर सका उसके लिए भगवान, परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों का शुक्रगुजार हूं. मेरे जैसा औसत से कम गुणों वाला व्यक्ति यह सब उनकी मदद से ही कर सका. देश में साफ्टवेयर उद्योग की पहचान नारायण मूर्ति ने कंपनी की 30वीं सालाना साधारण बैठक में कहा कि मेरी जीवन गाथा किसी भी सामान्य इंसान को प्ररित कर सकती है, जो देश और दुनिया में कुछ अलग करने की चाह रखता हो. उन्होंने कहा कि इंफोसिस की यात्रा उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा है.
मूर्ति ने कहा कि मेरे सहयोगी कहते हैं कि वह और इन्फोसि एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं. कंपनी के हर प्रमुख निर्णयों में मैं अब तक प्रथम पात्र रहा हूं. मैंने इसकी हर उपलब्धि का आनंद उठाया है और कंपनी के किसी भी गलत कदम पर सहानुभूति भी देता रहा हूं.

नारायण मूर्ति ग्लोबल स्तर पर भी उद्यमिता की अनुपम मूरत

दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति को भी आज के जमाने के 12 महानतम उद्यमियों में शुमार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'फॉच्र्यून' द्वारा जारी इस सूची में पहला स्थान जानी-मानी कंपनी एप्पल के दिवंगत प्रमुख स्टीव जॉब्स को दिया गया है।
इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स तथा फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हैं।

इन सभी उद्यमियों की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वे 'कांसेप्ट को कंपनी में तब्दील करने' तथा 'बिजनेस के स्वरूप को बदल देने' में कामयाब रहे हैं। इस अमेरिकी प्रकाशन ने कहा है कि इन्फोसिस के दूरदर्शी संस्थापक नारायण मूर्ति ने भारत की इस दिग्गज कंपनी को दुनिया के नक्शे पर ला खड़ा किया। 65 वर्षीय नारायण मूर्ति ने यह साबित कर दिया कि भारत भी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के कार्य में महारथ हासिल कर ग्लोबल स्तर पर मुकाबला कर सकता है जहां अब तक पश्चिमी देशों का ही प्रभुत्व रहा है।

फॉच्र्यून ने कहा कि इन्फोसिस के छह संस्थापकों में से एक और 21 वर्षों तक इसके सीईओ रहने वाले नारायण मूर्ति ने उस आउटसोर्सिंग क्रांति का बिगुल बजाने में मदद की जिससे  भारतीय अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर की संपत्ति आई तथा इसके साथ ही भारज दुनिया के बैक ऑफिस में तब्दील हो गया।

फॉच्र्यून ने उनके ही सबक का उदाहरण देते हुए कहा है कि जीरो से शुरुआत करने वाली किसी कंपनी को निश्चित रूप से चिरस्थायी वैल्यू सिस्टम वाले लोगों की एक टीम के साथ जुड़कर काम करना चाहिए। नारायण मूर्ति को 12 लोगों की इस फेहरिस्त में 10वां स्थान हासिल हुआ है। फॉच्र्यून ने मूर्ति को उद्धृत करते हुए कहा है कि आज बलिदान देने का वक्त है, फल की प्राप्ति तो कल होगी।

इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर स्टीव जॉब्स का नाम है जिन्हें फॉच्र्यून हमारी पीढ़ी का सबसे प्रखर उद्यमी मानती है। फॉच्र्यून ने उन्हें विजनरी, प्रेरक, ब्रिलियंट, बेहद सक्रिय जैसे विशेषणों से नवाजा है।

फॉच्र्यून ने कहा कि जॉब्स के बारे में सबसे आश्चर्यजनक तथ्य उनका यह विचार है कि मार्केट रिसर्च तथा फोकस ग्रुप्स ने इनोवेट करने की किसी व्यक्ति की क्षमता को केवल सीमित ही किया है, उसे विस्तारित नहीं किया। फॉच्र्यून ने कहा कि यह मानना शायद गलत नहीं होगा कि अगर जॉब्स ने कंज्यूमर रिसर्च पर बहुत अधिक भरोसा किया होता तो एप्पल का कोई भी बहुचर्चित प्रॉडक्ट मसलन आईपॉड, आईट्यून्स, आईफोन एवं आईपैड सामने नहीं आया होता।

इस फेहरिस्त में दूसरे स्थान पर बिल गेट्स है जो फॉच्र्यून के अनुसार ऐसे असाधारण उद्यमियों में से एक हैं जिन्हें अपने जीवन काल में दो बार दुनिया को बदलने का मौका मिला है। एक बार उन्होंने पर्सनल कंप्यूटर का आविष्कार कर एक क्रांति लाने में मदद की तथा अब वह दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी के रूप में ग्लोबल हेल्थ और पब्लिक एजुकेशन की चुनौतियों से जूझने में लगे हुए हैं।

फॉच्र्यून की फेहरिस्त में बांग्लादेश के अर्थशास्त्री एवं ग्रामीण बैंक के संस्थापक मुहम्मद युनूस का भी नाम शामिल है जिन्होंने अपनी संस्था के जरिये माइक्रोक्रेडिट के कांसेप्ट की शुरुआत की तथा उसे फैलाया। फॉच्र्यून ने कहा कि इस सूची में वैसे लोगों के नाम शामिल हैं जिनके पास दुनिया को बदलने की दृष्टि है।

Thursday, 12 July 2012

super 30 founder Anand kumar

Mathematician Anand Kumar transformed the heartbreak of his own unfulfilled academic dreams into inspiration for lifting up smart but disadvantaged young students like he once had been. Kumar’s school, “Super 30,” provides not only education but also food and shelter for students in Patna, India with the goal of helping them pass the entrance exam for the Indian Institute of Technology. His program is funded by tuition that more privileged students pay to attend a separate mathematics institute he founded in 1992, and he has received recognition from President Obama’s office and major Western media. With a small staff of only four teachers, Kumar over the past eight years has coached 212 of his 240 students to pass the exam. He says that he has been physically threatened by people who run similar training institutes in Patna, but he forges ahead with his small endeavor and hopes to admit more students in need to his program in the future. (Photo: Anand Kumar teaching his students, courtesy of Super 30.)

Sunday, 8 July 2012

[राम बालक राय ] जुलाई 08 2012 : समस्तीपुर चीनी मिल परिसर में यदि माल खुला तो होगा आन्दोलन .

[राम बालक राय ]  जुलाई 08 2012 : समस्तीपुर चीनी मिल परिसर में यदि माल खुला तो होगा आन्दोलन . उक्त  बाते राजद सुप्रीमो लालू यादव ने समस्तीपुर  जितवारपुर अस्तित समस्तीपुर कोल्एज परिसर के मैदान में कही। उन्होंने वह एक जनसभा को संबोधित करते हुइ कहा की मेरे शासनकल  में यह आरोप लगा की यहाँ की चीनी मिल बंद हो गयी लेकिन इसे हमने निजी तौर पर वायापरियो के हाथो नहीं बेचा /  अगर नितीश कुमार ने इसे बेचने का काम किया तो हम बर्दास्त नहीं करेंगे .आपको मै  बताने आया हु की यह क्षेत्र सामाजिक न्याय का क्षेत्र रहा है . यहाँ तीन  महीने के भीतर  तीस हत्याए हो  चुकी है  . यह सुशासन वाले बिहार के लिए महज एक उदहारण है . सरकार  पुलिस और प्रसाशन तथा मीडिया सब बेलगाम हो गया है . सुखा रहत बितरण के नाम पर सर्कार के मुलाजिमो ने खूब लूटा . फिर 200 करोर लूटने की योजना है . सचेत रहिये . उन्होंने कहा की सुशिल मोदी कहते है की लालू बुध हो गए है . हम तो युवाओ के बीच ही कम करेंगे।आधी से अधिक सीट हम युवाओ को देंगे . बिहार में गठबंधन से सवाल पर कहा की यह बेमेल शादी है . जल्द ही तलाक  हो जायेगा . देखो  भाई लोगन. उ प . चेत गया अब बिहार की   बारी  है. शिक्षको को ठेका पर बहल कर दिया . पैसा नहीं देता है . बिजली का रेट बढ़ा  दिया . एक सुई का कारखाना नहीं लगा . tet  के नाम पर  नौजवानों को ठगा जा रहा है . 36 लाख परीक्षा दिया एक लाख को पास किया . बाकि कागज फेक दिया .
संसद रघुबंश प्रसाद सिंह ने कहा की यह यात्रा ,जन आन्दोलन है . मिथिलांचल के लोगो की आवाज को बुलंद करने के लिए यह सुरु किया गया  है . हमने बिहार में तीन बिस्वविद्यालय खोलने की मांग सरकार  से की है . वैशाली में डीम्ड बिस्वबिद्यालय खोलने की मांग की है . मई कहता हु की जब बिहार बिकाश कर ही रहा है तो फिर बिशेस राज्य का दर्जा क्यों ? सभा को सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के अलावे संसद राम कृपाल यादव , राजनीती प्रसाद , राम दो भंडारी, पीताम्बर पासवान,बिधायक अख्तरुल इस्लाम  शाहीन ,दुर्गा प्रसाद सिंह . सुनील कुमार पुष्पम , अजय बुल्गानिन ,रोमा भारती आदि ने संबोधित किया .अध्यक्षता  जिला अध्यक्ष रामाश्रय सहनी  ने किया .

Friday, 6 July 2012

apradh nahi kiya , hoisle buland hai

यशवंत को जमानत: हौसला बुलंद है , अपराध नही किया है मैने

आज भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को जमानत मिल गई है. उन्‍हें साक्षी जोशी कापड़ी द्वारा दर्ज कराए गए मामले में कोर्ट ने जमानत दी है. इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी तथा उनकी दूसरी पत्‍नी व आईबीएन7 की एंकर साक्षी जोशी कापड़ी ने यशवंत के खिलाफ क्रमश: नोएडा के फेज टू तथा सेक्‍टर 49 थाने में अलग अलग मुकदमा दर्ज कराया था. तीस जून की दोपहर दर्ज कराए गए मामले में नोएडा पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए दो घंटे के भीतर ही यशवंत को गिरफ्तार कर लिया था.

साक्षी जोशी द्वारा दिए गए शिकायत पर सेक्‍टर 49 की पुलिस ने आईपीसी की धारा 294 तथा 7सीएलए के तहत मामला दर्ज किया था. बाद में परेशान करने की नीयत से पुलिस ने इसमें दो और धाराएं आईपीसी के तहत 509 तथा 72 आईटी एक्‍ट जोड़ दिया था. पुलिस ने अपनी तरफ से मामले को और ज्‍यादा लटकाने की कोशिश की परन्‍तु माननीय जज अनिल कुमार यादव ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका खारिज करने की मांग को अस्‍वीकार कर दिया. यशवंत की तरफ से बहस वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता शिखर ठकराल ने की.

अब विनोद कापड़ी वाले मामले में सुनवाई बीस जुलाई को होगी. पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 341, 386 और 506 के तहत मामला दर्ज किया है. हालां कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन पत्रकारों के पक्ष में यशवंत करपोरेट घरानों से उलझते और लड़ते रहे, वही पत्रकार साथी यशवंत के इस गाढे़ समय से बचते नजर आए. ऐसे जैसे कुछ हुआ ही न हो. तो कुछ लोग इस समय भी यशवंत को निपटाने में अपनी सारी ऊर्जा खर्च करते रहे. हालांकि वक्त किसी को नही बख्शता । यशवंत तो मात्र एक बहाना थें , पारंपरिक मीडिया यानी टीवी और प्रिंट ने न्यू मीडिया को टारगेट बना लिया है । यशवंत के पहले रांची से राजनामा डाट काम के संपादक मुकेश भारतीय के उपर भी १५ लाख रुपया मांगने का मुकदमा एक बिल्डर ने जिसने पायनियर अखबार की फ़्रेंचाईजी को अस्सी लाख रुपये मे विनोद सरावगी से  खरीदा था, उसने दर्ज करवाया था । कारण था मुकेश भारतीय के द्वारा आर टी आई से पायनियर केप्रसार संख्या तथा उसे सरकार से मिलने वाले विग्यापन के संबंध में जानकारी प्राप्त करना । यह पवन बजाज भाजपा का बडा नेता है तथा इधर हाल के दो सालों में अरबो रुपये कमाए है । बिल्डर का पत्रकारिता के क्षेत्र में दखल सिर्फ़ अपने काले कारनामे और कालेधन को बचाने के लिए होता है । यशवंत के उपर पतिपत्नी द्वारा अलगअलग झुठा मुकदमा करने का अर्थ साफ़ था । भडास की आवाज को दबाना । यशवंत के खिलाफ़ इस लडाई में वह सभी अखबार और टीवी चैनल शामिल हो गए है जिनके खिलाफ़ यशवंत हमेशा लिखते रहे हैं । हालांकि वेब मीडिया ने भी इसे चुनौती की तरह लिया है और हर प्रकार की लडाई लडने के लिए अपना इरादा पक्का कर चुका है । वेब मीडिया के क्षेत्र मे भी अगंभीर टाईप के लोगों का प्रवेश हो चुका है जो दावा तो पत्रकार होने का करते हैं , पत्रकारिता के संस्थानो की बडी बडी डिग्रिया दिखाते हैं परन्तु कहीं कोई उन्हे घास नही डालता है , वैसे लोगों के लिए यह मौका अच्छा लगा और उन्होने टीवी मीडिया की तारीफ़ शुरु कर दी ताकि कहीं स्टिंगर वगैरह बन जाए और भोजन भत्ते का जुगाड हो जाए । चलिए कम से कम जेल जाकर के भी यशवंत ने कुछ लोगो के भोजन भता की व्यवस्था तो कर दी । इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापडी ने एक नए लडके नुकेश चौरसिया के माध्यम से अपना इन्टरव्यूव वेब मीडिया पर प्रकाशित करवाया लेकिन विनोद कापडी का यह दाव उल्टा पड गया । इन्टरव्यूव से यह साफ़ हो गया कि मुकदमा गलत है तथा एस एस पी नोएडा प्रवीण कुमार ने झुठा मुकदमा दर्ज करवाने में मदद की । दोनो फ़सते नजर आए तो उस इन्टरव्यूव के क्लीप को वेब साईट से हटा दिया । यह गंदी हरकत मीडिया खबर नाम के एक पोर्टल ने की । लेकिन एक बार क्लीप यू ट्यूब पर अप लोड हो जाने के बाद यह जिम्मेवारी यू ट्यूब की बनती है कि जरुरत पडने पर उसे न्यायालय मे प्रस्तुत करे । यशवंत को टारगेट कर के वेब मीडिया को जो चुनौती परंपरागत मीडिया ने दी है , उसे अंजाम तक पहुचाना वेब मीडिया के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जरुरी है । जेल में रहने के बाद भी यशवंत का हौसला बुलंद है , उन्होने एक वरिष्ठ पत्रकार को मिलने पर बताया कि जब मैने कोई अपराध किया हीं नही है तो डरना क्या बुलंदी के साथ साथ यशवंत की मुस्कुराहट भी बता रही थी कि वे निकलने के बाद भी उसी तरह अपनी लडाई जारी रखेंगें ।