Wednesday, 14 November 2012

MULAYAM SINGH YADAV IN AAGRA

ARUN SINGH PATNA



समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं।
अंग्रेजी दैनिक मेल टुडे के अनुसार रविवार को आगरा में एक समारोह में मुलायम सिंह ने कहा, “उत्तर प्रदेश की जनता ने मुझे मुख्यमंत्री बनाने के लिए समाजवादी पार्टी को वोट दिया था। यहां तक कि पार्टी के नेता भी मुझे ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे। जब मैंने सीएम के पद के लिए अखिलेश का नाम सुझाया, तो बहुत सारे नेता नाराज भी हो गए। अपने फैसले के बारे में उन्हें समझाने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी।”
मुलायम ने कहा, “जो लोग बदलाव लाने की बातें करते हैं, उन्हें गरीब लोगों की रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरतों को पूरा करना चाहिए। देश के कुछ हिस्सों में लोग भूख की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं।”
अपने भाषण के दौरान मुलायम ने अखिलेश सरकार की तारीफ या आलोचना तो नहीं की, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा उत्तर प्रदेश की तरफ भी था।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस बात से इंकार किया है कि पार्टी सुप्रीमो का आगरा में दिया गया बयान अखिलेश की सरकार की तरफ इशारा कर रहा था। राजेंद्र चौधरी के मुताबिक मुलायम कई बार यह कह चुके हैं कि वह अखिलेश सरकार के प्रदर्शन से 100 फीसदी खुश हैं।
उत्तर प्रदेश में ऊपर से सब शांत लग रहा हो किंतु समाजवादी पार्टी के कई नेता अभी भी अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने से खुश नहीं हैं। वे चाहते हैं कि मुलायम सिंह यादव ही मुख्यमंत्री का पद संभालें।

Thursday, 8 November 2012

gramsabha me ho mahila ki bhagidari

ग्राम सभा में 50 फीसद महिलाओं की हो भागीदारी
मुजफ्फरपुर की महिला हो रही जागरूक .उन्होंने अपना आगाज बजवाता इसके लिए सुरु  कर दिया है .देखिये उसकी एक बानगी 

अपराजिता महिला जनप्रतिनिधि संगठन के सदस्यों ने गुरुवार को मांगों के समर्थन में रैली निकाली। वहीं प्रतिनिधि मंडल ने 18 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन भी डीएम को सौंपा। इस दौरान समाहरणालय परिसर पहुंची रैली में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जाने पर प्रशासन ने उसे जब्त कर लिया। इस संबंध में नगर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। मजिस्ट्रेट वशिष्ठ कुमार के बयान पर पार्वती देवी, विद्या देवी, जयकाली देवी, मीरा देवी और लक्ष्मी देवी को नामजद करते हुए अन्य को अभियुक्त बनाया गया है।
निर्देश की संचालिका रंभा कुमारी, पार्वती देवी, लक्ष्मी देवी, विद्या देवी, विमला देवी, जहांआरा, लालमुनी देवी ने बताया कि ग्राम पंचायत के कार्यो को सशक्त एवं सुचारू रूप से संचालन की मांग को लेकर रैली निकाली गई। डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुख रूप से पंचायत का कार्य संचालन नियमावली का गठन, नियमित व प्रभावी बनाने को ठोस नियम, ग्राम सभा में 50 फीसद महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित, वार्ड सभा को कानूनी मान्यता, जविप्र की दुकान के आवंटन में 50 फीसद महिलाओं को आवंटन, मध्याह्न भोजन में वृद्धों व बेसहारों को भी शामिल करने, निगरानी समिति में कम से कम आधी संख्या महिलाओं की हो, पंचायत प्रतिनिधियों को मानदेय एवं भत्ता की व्यवस्था सहित अन्य मांगे शामिल हैं।

patna me hua lathi charge ki chautarfa ninda

Raman
पटना में शिक्षकों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध की तीखी भर्त्सना की जा रही है. इस घटना के विरोध में जहां माकपा ने रविवार को एसडीओ कार्यालय के सामने मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया वहीं विभिन्न स्थानों पर शिक्षक संगठनों पर बैठक कर इस कार्रवाई की आलोचना की.
माकपा जिला कार्यालय से निकला यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरते हुए ओवरब्रीज को कर दिया. बाद में एसडीओ ऑफिस के सामने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका. इस अवसर पर गंगाधर झा की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा को जिला मंत्री अजय कुमार, राम दयाल भारती, महावीर पोददर, रघुनाथ राय, महेश कुमार, भोला राय, राम सागर पासवान, ए.हादी समेत अन्य ने संबोधित करते हुए इसे मुख्यमंत्री की तानाशाही करार दिया.
बिहार अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ एवं बिहार नगर पंचायत प्रारंभिक शिक्षक संघ ने संयुक्त रूप से सीएम का पुतला फूंका गया. भोला टॉकिज चौक पर पुतला फूंकने के बाद 5 एवं 6 नवंबर को इसके विरोध में सामूहिक अवकाश पर रहने की घोषणा भी की गयी. इसमें डॉ.पवन कुमार पासवान, अब्दुल कयूम, पवन कुमार यादव, इश्तयाक अहमद, चंद्रशेखर प्रसाद राय, घनश्याम पंडित, अनिल कुमार पांडेय, मो. शब्बीर, रश्मि रंजन, मोजाहिद हुसैन, इन्दू कुमारी, अनिता कुमारी आदि ने भी भाग लिया.
उजियारपुर इकाई ने अमरेन्द्र कुमार अमर की अध्यक्षता में बैठक कर इस घटना की तीखी आलोचना की. इसे राम बालक राय, सुमन गोपाल, प्रमोद कुमार, श्रवण मल्लिक, सरोज सिंहा, अजय झा आदि मौजूद थे. कल्याणपुर प्रतिनिधि के अनुसार, प्राथमिक शिक्षक संघ के अंचल सचिव रामाधार राय की अध्यक्षता में आपात बैठक मध्य विद्यालय जितवरिया में आयोजित की गयी.
इसमें निहत्थे शिक्षकों पर हुई लाठी चार्ज की तीखी आलोचना की गयी. हसनपुर प्रतिनिधि के अनुसार, नियोजित शिक्षकों पर पटना में हुई लाठी चार्ज की बिहार नगर पंचायत प्रारंभिक शिक्षक संघके राम प्रवेश यादव,अरूण कुमार घोष, सुशील यादव, राजीव कुमार सिंह, नील कुमार राय आदि ने कड़ी भर्त्सना की है.

pasuchara udhog ko badhawadenge mantri giriraj sin gh

Biharearthteam samastipur
 पशुचारा उद्योग  को बढ़ावा देंगे : पशुपालन मंत्री  गिरिराज
राम सेवक हजारी के स्राध्कर्म में भाग लेने पहुचे समस्तीपुर और पहुचकर यहाँ से जुरे कृषक भाइयो से बिभाग के आगामी योजनाओ की जानकारी देते देने के क्रम में कहा कि  सूबे के सभी मिल्क यूनियन में पशुचारा उद्योग लगाने की योजना है। इसके प्रथम चरण में रोसड़ा को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा की समस्तीपुर , बेगुसराई ये सब हमारी पथ्मिकता में है
रोसड़ा गोशाला इसका केन्द्र होगा। ये बातें बिहार सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन मंत्री गिरिराज सिंह ने कही। वे सन साइन स्कूल ढरहा के प्रांगण में आयोजित ढरहा दुग्ध उत्पादन सहयोग समिति लिमिटेड के तृतीय बोनस वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन करते हुए मंत्री ने दुग्ध उत्पादक किसानों से व्यावसायिक हरा चारा उत्पादन की अपील करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली पर ही राज्य और देश की समृद्धि निर्भर है। उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु समेत विभिन्न राज्यों में पशुपालकों की बेहतर स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि शून्य लागत पर दूध और अंडे का उत्पादन संभव है। इसके लिए किसानों को स्वयं आगे आना होगा। तभी गांधी-लोहिया एवं दीन दयाल उपाध्याय का सपना साकार होगा। मंत्री ने दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं मत्स्य पालन पर बल देते हुए सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदानों का लाभ उठाने की अपील की। भाजपा नेता जगन्नाथ ठाकुर ने गिरिराज सिंह के मंत्रित्व काल में 15 करोड़ के पशुपालन विभाग को 15 हजार करोड़ तक पहुंचाने की जानकारी दी। इसके अलावा मिथिला मिल्क यूनियन के अध्यक्ष श्याम शंकर ठाकुर, सुधा डेयरी रोसड़ा के प्रबंधक राजेश कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील चौधरी, सन साइन स्कूल के निदेशक गणेश प्रसाद राय आदि ने भी अपने-अपने विचार रखे। समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार राय ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। महेश प्रसाद राय ने अतिथियों का स्वागत किया। पंडित राम नरेश राय की अध्यक्षता में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डा. परमानंद मिश्र ने अपने स्वागत भाषण में भारत को कृषि की भूमि बताया। इस दौरान भाजपा नेता राम तीरथ चौधरी, कौशल किशोर सिंह, दिनेश झा, अनिश राज, संतोष राय के अलावा पूर्व मुखिया मोती प्रसाद राय, कैलाश प्रसाद राय, रामानंद राय एवं रौशन कुमार राय आदि मौजूद थे। मौके पर दो सौ दुग्ध उत्पादकों के बीच बोनस का वितरण किया गया।

Wednesday, 7 November 2012

dhanya hua mujari ki dharti

Date 07.11.2012
समस्तीपुर 07.11.2012
आज  स्वर्गीय राम सेवक हजारी जी के मुजारी गाँव में उनके आवास परिसर में आयोजित सर्धन्जली सभा में राज्य के उप मुख्यमंत्री श्री सुशिल कुमार मोदी ,श्री विजय कुमार चौधरी मंत्री जल संसाधन, मंत्री पशुपालन श्री गिरिराज सिंह ,स्पीकर बिहार बिधान सभा श्री श्री उदय नारायण चौधरी,बिधायक श्री दुर्गा प्रसाद सिंह आर जे डी उजियारपुर सांसद अश्वमेघ देवी सहित कई बिधायक सांसद आदि ने सर्धांजलि अर्पित की .बिदित हो की श्री हजारी कर्पूरी ठाकुर के समकालीन व समाजवादी आन्दोलन के करी के रूप में थे
उनके निधन से समस्तीपुर की समाजवादी धारा कमजोर पर गयी
अपलोड  राम बालक रॉय

Tuesday, 6 November 2012

taslimuddin rjd me laute

राम बालक रॉय
06.11.2012
तस्लीमुद्दीन राजद में लौटे 

तस्लीमुद्दीन
पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद तस्लीमुद्दीन सत्तारुढ जदयू का दामन छोड़कर लालू प्रसाद नीत राजद में शामिल हो गये.
दस सकरुलर रोड स्थित अपने आवास पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने गर्मजोशी से तस्लीमुद्दीन का एक बार फिर से पार्टी में स्वागत किया. बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जुलाई 2010 में राजद का दामन छोड़कर तस्लीमुद्दीन जदयू में शामिल हो गये थे.
नीतीश 100 प्रतिशत झूठे
राजद खेमे में वापसी के अपने निर्णय को न्यायोचित ठहराते हुए किशनगंज के पूर्व सांसद ने कहा कि नीतीश कुमार 100 प्रतिशत झूठे हैं. सीमांचल के जिलों के विकास के लिए उन्होंने जो वायदे मुझसे किये थे उसे पूरा नहीं किया.
   
उन्होंने कहा कि वह राजद के सिद्धांतों और नीतियों में अपने विास और विचारधारा के कारण राजद में वापसी कर रहे हैं. यह सत्ता में वापसी के लालच के लिए किसी प्रकार से नहीं है.

अपने पुत्र सरफराज आलम के बारे में पूछे जाने पर तस्लीमुद्दीन ने कहा, ‘आलम अपना फैसला लेने में सक्षम है. उसे क्या करना है इसका फैसला वह स्वयं करेगा.’

तस्लीमुद्दीन पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के कार्यकाल के दौरान संयुक्त मोर्चा सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे. वह कई बार सांसद और विधायक रह चुके हैं. जदयू ने तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम को अररिया के जोकीहाट निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा का टिकट दिया था. आलम अभी विधायक हैं.

लालू प्रसाद ने कहा, ‘तस्लीमुद्दीन की राजद में वापसी से पार्टी को मजबूती मिलेगी। वह एक धर्मनिरपेक्ष छवि के व्यक्ति हैं. इससे आगामी चुनावों में राजद को बल मिलेगा.’   

Saturday, 20 October 2012

reserch on yadav by a japanse proffesor

राम बालक रॉय पोस्ट 20अक्टोबर 2012
Japanese scholar maps complex caste equations in Bihar


Fascinated by the intricate caste equations which have played a decisive role in determining the fortunes of political parties in Bihar, a Japanese scholar has been visiting the state since 1974, when socialist leader Jayaprakash Narayan launched the 'Total Revolution'.
Ohashi Masaaki, a professor of rural sociology at Keisen University in Japan, has been closely mapping the vicissitudes of the Yadav community in Bihar.
Masaaki (58) has now returned to his 'favourite' place to do extensive research on the lifestyle of Yadavs living in the rural areas of the state.
"I am doing an academic research on the social, economic, political and other aspects of the Yadav community in Bihar under the Nitish Kumar-led government," Masaaki said.
He said the Yadavs had emerged politically stronger after their leader Ram Lakhan Singh Yadav, a former MP, organised a convention at Gaya in 1976. "But they became a real political force to reckon with after RJD president Lalu Yadav came to power," Masaaki added.
Masaaki thinks the caste equations in Bihar are changing under the incumbent chief minister Nitish Kumar and it would be interesting to study the position of the Yadavs from a fresh perspective now.
"The majority of Yadavs strongly supported Lalu when he was in power, but that is not the case now," he said. "They have split and joined other parties."
The Japanese professor said the caste system had somewhat weakened in Bihar but it could not be done away with entirely because of the politics of vote bank in the state.
This is not the first time that Masaki is doing research on a particular caste in the state. "I have already done research work on various castes and communities in Bihar such as Pasi, Teli, Kurmi, Koeri and Bhuiyan, also known as Mushhars," he said.
He said the Kurmis and Keoris had earlier come together under the 'Luv-Kush' front but had fallen apart.
Masaaki said he had found out during the course of his research that the social and economic conditions of the underprivileged castes such as Bhuiyans from Gaya had hardly changed over the years.
"I have been studying Bihar's caste system for the past 12 years but I have not noticed any perceptible change in their lifestyle," he said.
"Other castes such as Pasis and Telis have forged ahead in their lives, thanks to their business," Masaaki added.


Read more at: http://indiatoday.intoday.in/story/japanese-scholar-maps-caste-equations-bihar/1/158913.html

Sunday, 7 October 2012

hotal rajnity aur lekhak ki kahani

रविवार से साभार
अरुण प्रकाश 4 वर्षों से ज्यादा समय से फेफड़े की बीमारी एम्फीसीमिया से ग्रस्त होकर कृत्रिम ऑक्सीजन के सहारे जीवित थे. उनका घर ही अस्पताल हो गया था. पत्नी वीणा प्रकाश अस्पताल की परिचारिका, नर्स की भूमिका में ऑक्सीजन की नली से उन्हें हर वक्त जुड़े रखने और उनकी पल-पल बढ़ती परेशानियों में उनकी निकट सहयोगी थीं. मुझे हर बार ऐसा लगता था कि उनके पास कुछ ऐसी बातें कहने के लिए हैं, जो उनने अब तक किसी से नहीं कही हो और अब वे मुझे बतायेंगे. मैं इसी उम्मीद, मोह के साथ उनके पास दौड़ता रहा. मैं कभी खाली नहीं लौटा, लेकिन कुछ बातें ऐसी थीं, जो वे मुझसे भी कह नहीं पाये. बीमारी के बाद अस्पताल की सुविधा के लिए दिलशाद-गार्डेन का घर छोड़कर मयूर विहार स्थित किराए के घर में वे रहने लगे.

एक दिन उनके घर में ऑक्सीजन सिलेण्डर और किचन का सिलेण्डर दोनों एक ही दिन बाजार से आया. मैंने हँसते हुए उनसे कहा- क्या हो गया, चूल्हे को जलाने के लिए सिलेण्डर, आदमी को जिलाने के लिए सिलेण्डर? एक घर में दो तरह के सिलेण्डर. उनने हँसते हुए कहा- देखो एक ही जलावन चूल्हे की आंच भी है और अर्थी की आग भी. इसलिए सिलेण्डर के प्रकार पर क्या चिंतन कर रहो हो.

10 दिसंबर 2010 की यह बातचीत मयूर विहार स्थित उनके आवास पर हमने लिपिबद्ध की है. उस समय उन्हें रोज 16-18 घंटे ऑक्सीजन की दरकार होती थी. बात करते-करते अचानक वे किसी दूसरे विषय पर चले जाते थे. दरअसल ऐसा ऑक्सीजन की कमी होने पर साँस फूलने से होता था. अरुण प्रकाश की अदम्य जीवन यात्रा पर यह संभवतः उनके जीवन का अंतिम साक्षात्कार है.


n अपने जीवन संघर्ष का वह हिस्सा जो कहीं दर्ज नहीं है? अरुण प्रकाश के कथाकार बनने की संघर्ष गाथा क्या है?

राजनीतिक माहौल में मैं पला-बढ़ा पर राजनीति में मेरी दिलचस्पी नहीं थी. मैंने हायर सेकेण्डरी मंझौल से की थी और ग्रेजुऐशन करने शाहपुर-पटोरी आ गया था. मैं विज्ञान का छात्र था और टायफाइड से लंबे समय तक बीमार रहने के कारण दो पेपर में फेल हो गया था.

अच्छा, मैंने यह नहीं बताया कि मैं शाहपुर-पटोरी कैसे और क्यों पहुँचा था? कर्पूरी ठाकुर ने अपने इलाके में डिग्री कॉलेज खोला था तो मेरे पिता से घरेलू रिश्ते की वजह से मुझे अपने कॉलेज में दाखिला कराया था. इस कॉलेज का नाम आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय था. कर्पूरी जी ने मुझे एक साइकिल खरीद कर दी थी. जब कर्पूरी जी पटना से अपने इलाके आते थे तो मेरी साइकिल से क्षेत्र भ्रमण करते थे और लौटते हुए मछली साथ लाते थे. चाचा-भतीजा साथ-साथ मछली बनाते और खूब चाव से खाते थे.

राममनोहर लोहिया जाति-तोड़ो आंदोलन में शाहपुर-पटोरी आये थे. रेलवे मैदान में लोहिया की बड़ी रैली हुई थी. मुझे कर्पूरी चाचा ने लोहिया के साथ लगा दिया था. पहली मुलाकात में ही लोहिया ने मेरे स्वभाव और प्रकृति को देखते हुए पूछा- तुम क्यों आ गये सोशलिस्टों के साथ? मैंने कहा- मैं सोशलिस्ट बनने नहीं, जाति-तोड़ो आंदोलन में सहयोग करने आया हूँ. डॉ. ब्रह्मदेव और शरण जी जाति-तोड़ो आदोलन में स्थानीय संयोजक थे. उस जाति-तोड़ो रैली में 25-30 हजार लोग जुटे थे. कर्पूरी जी सिर्फ नाइयों के नेता नहीं थे, वह इस रैली से साबित हो गया था. मुझे आश्चर्य होता है कि कालांतर में समाजवादी जाति तोड़ने के बजाय जाति में खाद डालने लगे.

n आप क्या आर्थिक संकट की वजह से शाहपुर-पटोरी पढ़ने गये थे?

और वजह क्या हो सकती है? हमारे पास दूसरा विकल्प ही क्या था? पिताजी सोशलिस्ट पार्टी के होलटाइमर थे. उन्हें पूर्णकालिक कार्यकर्ता का मानदेय 40 रुपये मासिक मिलता था. इस 40 रुपये से परिवार चलाना और बच्चों को पढ़ाना कैसे संभव था? कर्पूरी जी खुद मुझे लेकर शाहपुर-पटोरी आये थे तो कॉलेज की फीस माफ कर दी गयी थी. शाहपुर-पटोरी का यह ढेढ़ साल ऐतिहासिक है. बीएससी फेल का तमगा और जाति-तोड़ो आंदोलन में शरीक होने का आत्मगौरव. तब मेरी उम्र 18 वर्ष की थी. कॉलेज में फेल होने से हौसला फेल नहीं हुआ था. मैं शाहपुर-पटोरी का आभारी और ऋणी हूँ. वहाँ विनोद जायसवाल मेरे दोस्त थे.

n आप अपने पिताजी के बारे में कुछ बतायेंगे? उन्होंने आपके जीवन को किस तरह प्रभावित किया है?

मेरे पिताजी का नाम रूद्रनारायण झा था. परंपरागत तौर से पुश्तैनी पंडिताई, पुरोहित उनके जीवन का पेशा होता, अगर वे राजनीति में नहीं आते. वे खूब पैदल चलते थे और फकीरी जिंदगी जीते थे. पिताजी 1967 में मुंगेर जिला संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव और प्रदेश चुनाव प्रभारी थे. मधु लिमये को मुंगेर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया गया था. बिहार की सोशलिस्ट पार्टी का एक बड़ा हिस्सा नहीं चाहता था कि महाराष्ट्र के मधु लिमये को मुंगेर से चुनाव लड़ाया जाये. मधु लिमये की जीत को पिताजी ने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था. मधु लिमये दो बार मुंगेर से सांसद हुए. पिताजी 1968 में राज्यसभा से सांसद हुए. 1970 में एक साजिश के तहत पिताजी की सड़क दुघर्टना में हत्या हुई, जिसे सड़क दुर्घटना में मौत कहकर प्रचारित किया गया. यह सड़क दुर्घटना नहीं, राजनीतिक हत्या थी. सीबीआई जाँच भी हुई पर दोषी कौन, यह रहस्य सार्वजनिक नहीं हुआ. किसी को सजा नहीं मिली. उनकी मौत के बाद पार्टी रैली के लिए रेल बुकिंग का बकाया किराया 38 हजार रुपये और उनके बैंक खाते में 238 रुपये मात्र, यही उनकी जिंदगी थी. उनकी मृत्यु के बाद एसएम जोशी ने पार्टी फंड से रेल किराया का बकाया चुकती कराया और मेरे परिवार को रेल ऋण के बोझ से मुक्ति मिली.

n जब पिताजी की मौत हुई उस समय आप क्या कर रहे थे? आपने खुद को किस तरह खड़ा किया?

शाहपुर-पटोरी से बीएससी फेल की उपलब्धि के साथ मैं अपने गाँव निपनिया, बरौनी वापस लौट आया था. सातवीं तक के बच्चों को विज्ञान-हिन्दी का ट्यूशन पढ़ाकर मैं खुद को संभालने की कोशिश कर रहा था. जानकारी मिली कि भुवनेश्वर से बिना बीए किए बीएड करना संभव है. उधर प्रवेश परीक्षा दिया तो भुवनेश्वर में बीएड और पूसा एग्रीकल्चर में बीएससी, कृषि में एक साथ सफलता मिली. बीएड और बीएससी, कृषि दोनों में कंपीट होना उस समय बहुत सहज नहीं था. अब पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि मुझे पूसा या भुवनेश्वर पढ़ने के लिए भेज सकें. वे बेटे को पढ़ाने के लिए ना ही किसी के सामने हाथ पसार सकते थे, ना ही इसे मुद्दा बना सकते थे. उन्होंने सब कुछ सहज तरीके से स्वीकार किया और मुझे हताशा से बचाया.मैं शाहपुर-पटोरी अपना अंक पत्र लेने गया तो मेरे हिस्से का स्कॉलरशिप आया हुआ था. उस स्कालरशिप के पैसे की मैंने कोई कल्पना भी नहीं की थी. इस पैसे से कॉलेज का कुछ बकाया भी चुकाया और उत्साहित होकर बेगूसराय जीडी कॉलेज में केमेस्ट्री ऑनर्स में दाखिला लिया. पास कोर्स में मैं फेल हो गया. इस बार मैं बीमार नहीं हुआ था. फेल होने का कीर्तिमान भी मुझे ही कायम करना था. इसी समय एक फिल्म में होटल मैनेजमेंट के लड़कों को डायनेमिक पर्सनॅाल्टी में देखा तो मन पुलकित हो गया. यह दौर जीवन में सपनों में कुछ नया करने का था. कहीं से जानकारी मिली कि पूसा इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, दिल्ली में हायर सेकेण्डरी की डिग्री के आधार पर प्रवेश संभव है. पिताजी सांसद होकर दिल्ली आ गये थे तो दिल्ली में पढ़ाई अब संभव हो गया था. 1968 में दिल्ली में होटल मैनेजमेंट में अपना दाखिला हो गया. मैनेजमेंट की पढ़ाई के बीच ही पिताजी की हत्या हो गयी. पिताजी के न होने पर पढ़ाई पूरी करना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी.

अरुण प्रकाश

n पिताजी के गुजरने के बाद किस तरह पढ़ाई पूरी हुई और किस तरह जीवन को ठौर मिला?

मृत्यु से पूर्व पिताजी ने मेरी शादी करा दी थी. शादी की जिम्मेदारी और पढ़ाई को पूरा कर नौकरी ढूंढ़ने की बेचैनी थी. मैंने किन मुश्किलों और किन-किन के सहयोग से पढ़ाई पूरी की, यह वाकया एक अलग दास्तान है. पढ़ाई पूरी कर 1971 में हाथ में रिजल्ट लिये बिना मैं नौकरी ढूंढ़ने लगा था. 2-3 माह होटल क्लेरिजेज में वेटर की नौकरी की. फिर लोदी होटल में वेटर की नौकरी मिल गयी. लोदी होटल में अज्ञेय जी को खाना परोस कर खिलाने का सौभाग्य मुझे प्राप्त है. अज्ञेय जी इला डालमिया के साथ खाना खाने आये थे. अज्ञेय जी मुझे पहचानते थे, इसलिए कि अज्ञेय जी के भाई गोगरी जमालपुर में डॉक्टर थे. उनके डॉक्टर भाई मेरे पिताजी के द्वारा अज्ञेय जी के लिए कभी कुछ सामान भेजते थे तो मैं ही उन्हें पहुँचाने जाता था.

इला जी ने जब खाने के बाद टीप के पैसे ट्रे में रखे तो अज्ञेय जी ने उन्हें तत्काल रोक दिया था. मुझे वेटर के रूप में देखकर उनकी आँखें कुछ नम हो गयी थीं और खाने के टेबल पर वे कुछ गमगीन हो गये थे. होटल से छूटते हुए मुझे स्पर्श करते हुए उन्होंने आत्मीयता से मुझसे बातें की. मैं उन्हें गेट से बाहर छोड़ आया. उन्होंने छूटते हुए बहुत गंभीरता से मुझसे कहा- ‘कभी कोई परेशानी हो तो मुझे बता देना.’ भारतीय समाज में तब भी होटल में वेटर का काम सम्मानजनक पेशा नहीं था. मेरे लिए इससे ज्यादा सम्मानजनक कार्य दूसरा कुछ भी नहीं था. मुझे पहली बार वेटर का काम करते हुए आत्म-सम्मान महसूस हुआ था कि हिन्दी के एक महान लेखक अज्ञेय ने एक वेटर को इज्जत की नजर से देखा था. इसी रेस्तरां में मैंने कृष्ण मेनन को पहली बार देखा था.

n अरूण प्रकाश वेटर की जिंदगी से कब मुक्त हुए?

दो साल वेटर की शानदार जिंदगी जीने के बाद मैं पटना आ गया. 1972 में पटना के होटल नटराज में अस्टिेंट मैनेजर का काम मिल गया. इस होटल में मालिक के बाद प्रबंधन की मिल्कियत मेरे ही हाथ में थी. यहाँ आकर वेटर की जिंदगी से मुक्ति मिल गयी. 1973 में बरौनी फर्टिलाइजर में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिल गयी. अब हम भारत सरकार के गेस्ट हाउस में असिस्टेंट मैनेजर हो गये. नौकरी करते हुए जीवन थोड़ा व्यवस्थित हुआ तो सीपीआई के श्रमिक संगठन एटक के साथ कारखाना मजदूरों को संगठित करने में शक्ति लगायी. इस दौर में कारखाना से बाहर बीड़ी मजदूरों को संगठित करते हुए जीवन और समाज का अलग तजुर्बा हासिल हुआ. बरौनी में 12 वर्ष बिताने के बाद 1986 में फर्टिलाइजर में हिन्दी अधिकारी नियुक्त होकर दिल्ली आ गये.

n आपने लिखना कब शुरू किया?

लेखन मैं छात्र जीवन से ही कर रहा था पर कभी इस विधा को ज्यादा महत्व नहीं दिया. मंझौल के जगदम्बी पुस्तकालय, शोकहारा, बरौनी के संस्कृत महाविद्यालय पुस्तकालय और सर गणेशदत्त कॉलेज लाइब्रेरी से पढ़ते हुए मेरे भीतर जो पढ़ने की शैली विकसित हुई थी, बरौनी में कारखाना मजदूरों और बीड़ी मजदूरों के बीच नाटक करते हुए लेखकीय शिल्प की समझ विकसित हो रही थी. मेरे पिता साहित्य पढ़ने के शौकीन थे. वे जब भी यात्राओं से लौटकर घर आते थे तो साहित्यिक पत्रिकाएँ उनके झोले में भरी रहती थीं. मैंने प्रेमचंद, निर्मल वर्मा, चेखव, गोर्की सबको पढ़ा था पर मुझे अपना रास्ता खुद ही चुनना था. पढ़ना एक तहजीब है, उस पर चिंतन करना और अपने भीतर लेखकीय समझ विकसित करना दूसरी तहजीब है.

मैंने शुरू में कुछ कविताएँ अंग्रेजी में भी लिखीं. पटना के एक अंग्रेजी पत्र में कुछ अंग्रेजी कविताएँ छपी थीं. मेरी अंग्रेजी कविताई को किसी ने भाव नहीं दिया. मेरी पहली कहानी कॉलेज जीवन में ‘कहानीकार’ में छपी थी. पारिश्रमिक के 30 रुपये का मनिऑर्डर पहले मिल गया, कहानीकार की प्रति कुछ वर्ष बाद मिली थी. वह कहानी थी- ‘छाला’. बरौनी में जीवन कुछ व्यवस्थित हो रहा था पर जीवन राजनीतिक-सामाजिक कार्यों में ज्यादा गहन होता जा रहा था. ‘रक्त के बारे में’ 1978 में मेरा पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ. मुझे पक्का भरोसा हो गया था कि कविताएँ लिखकर हम सारी बात नहीं कह सकते हैं. फिर कविता पर गद्य का प्रभाव हुआ.

n कवि अरूण प्रकाश कथाकार के रूप में कब प्रकट हुए?

बरौनी में रहते हुए ‘कोंपल कथा’ का फ्रेम दिमाग में तैयार हो गया था. ‘कोंपल कथा’ लिखने में 5 साल का दिमागी व्यायाम चलता रहा. यह काम मेरा पहला तसल्ली-बख्श काम था. बेगूसराय के एक स्थानीय साप्ताहिक में ‘कोंपल कथा’ सीरिज में छप रहा था. अचानक बंद हो गया, क्योंकि संपादक के जाति संस्कार पर कथा के पात्र-काल विन्यास से चोट लगी थी. ‘कोंपल कथा’ को 5 बार रीराइट किया. एक मित्र थे, निरंजन जी, वे गुजर गये. उन्होंने कई बार हमारा लिखा पढ़ा और मुझे बार-बार ठीक से सोचना पड़ा.

कमलेश्वर जी ने ‘गंगा’ के संपादकीय में लिखा था कि पंजाब में मजदूर मारे जा रहे हैं. बिहार, उत्तर-प्रदेश के हिन्दी साहित्य में कुछ नहीं हो रहा है. मैंने संपादक जी को चिट्ठी लिखी- एक नहीं, 20 कहानियां इस विषय पर लिखी गयी हैं. मैंने भी एक कहानी लिखी है. कमलेश्वर जी का फोन आया- आप अपनी कहानी भेज दो. ‘भैया एक्सप्रेस’ तीन बार दूसरी जगह छपने के बावजूद 1987 में ‘गंगा’ में प्रकाशित हुई. अब मैं हिन्दी अधिकारी होकर दिल्ली में रह रहा था.

Friday, 13 July 2012

Engg. Sridharan Sahab ji ki panch mul mantra

[राम बालक राय ]13 जुलाई 2012 .

श्रीधरन की सफलता के पांच मंत्र

मेट्रो मैन के नाम से मशहूर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपारेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक ई़. श्रीधरन ने इस धारणा को बदल कर रख दिया कि भारत में परियोजनाएं सही समय पर पूरी नहीं हो सकतीं। उनके प्रेरणादायी नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो का 65 किलोमीटर के विस्तार वाला पहला फेज अपने तय समय से पहले केवल दो साल और नौ माह में पूरा हो गया। यह तो काफी बाद की बात है। आज से करीब चार दशक पहले ही उन्होंने छह महीने के प्रोजेक्ट को सिर्फ डेढ़ महीने में पूरा कर संकेत दे दिया था कि आने वाले समय में वह भारत के गौरव साबित होंगे। काकीनाडा गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले श्रीधरन का जन्म केरल के पलक्कड़ में 12 जून 1932 को हुआ था। दिल्ली मेट्रो के पहले उन्होंने कोंकण रेलवे जैसी कठिन और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा भारत के पहले मेट्रो प्रोजेक्ट कोलकाता मेट्रो के निर्माण में भी उनकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण थी। अपनी अमूल्य सेवाओं के लिए श्रीधरन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। 1963 में उन्हें ‘रेल मंत्री अवॉर्ड’ दिया गया तो 2003 में ‘टाइम मैगजीन’ ने उन्हें ‘वन ऑफ एशियाज हीरोज’ के खिताब से नवाजा। फ्रांस सरकार ने उन्हें 2005 में ‘नाइट ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया, वहीं भारत सरकार ने उन्हें 2001 में ‘पद्मश्री’ तथा 2008 में दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ प्रदान किया। श्रीधरन ने सरकार से कई बार रिटायरमेंट देने के लिए आग्रह किया, लेकिन सरकार उन जैसे ‘जीनियस’ की सेवाओं से महरूम नहीं होना चाहती थी, लिहाजा उनकी रिटायरमेंट टलती रही। लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए सरकार ने उनके रिटायरमेंट को स्वीकृति दे दी है और वह 31 दिसंबर 2011 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आइए निगाह डालते हैं उनकी सफलता के सूत्रों पर- 

समय की पाबंदी
समय की पाबंदी यानी पंक्चुएलिटी का ई़. श्रीधरन से बढ़ कर दूसरा उदाहरण खोजना नामुमकिन नहीं तो नामुमकिन जैसा जरूर है। 1963 में आए एक तूफान ने रामेश्वरम् को तमिलनाडु के मुख्य भू-भाग से जोड़ने वाले ‘पंबन ब्रिज’ को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। रेलवे ने उसकी मरम्मत के लिए छह महीने का लक्ष्य रखा, जिसे श्रीधरन के तत्कालीन बॉस (जिनके अधिकार क्षेत्र के अंदर यह ब्रिज आता था) ने घटा कर तीन महीने कर दिया और इसका जिम्मा श्रीधरन को सौंपा, जिन्होंने केवल 46 दिन में ही यह काम पूरा कर दिया। उनका मानना है कि किसी भी काम में सफल होने के लिए पंक्चुएलिटी बहुत जरूरी है। यही वजह है कि उनके नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो के अब तक के सभी फेज तय समयसीमा और बजट में पूरे किए गए हैं।

ईमानदारी
श्रीधरन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है उनकी ईमानदारी। उनका मानना है कि काम केवल समय पर पूरा होना ही काफी नहीं है, बल्कि वह स्तरीय भी होना चाहिए और इसके लिए ईमानदारी बहुत जरूरी है, तभी पूर्ण रूप से सफलता मिलेगी। वह कहते हैं, ‘हम पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के मामले में कभी समझौता नहीं करते।’

पेशेवर योग्यताश्रीधरन काम करने वालों की पेशेवर योग्यता को लेकर कोई समझौता नहीं करते, लिहाजा उनके द्वारा हाथ में लिया गया कोई भी प्रोजेक्ट असफल या कम गुणवत्ता वाला साबित नहीं हुआ। जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो के निर्माण कार्य में लगे लोगों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए विदेश भी भेजा, क्योंकि उनका मानना है कि किसी भी काम की सफलता अंतत: उसे करने वाले लोगों की योग्यता पर ही निर्भर करती है।

स्पष्ट सोच और दृष्टि
कोई भी काम तभी सफल होता है, जब उसे करने वाले के पास एक स्पष्ट सोच और दृष्टि होती है। दुनिया के महान लोगों की सफलता में इस तथ्य को तलाशा जा सकता है। श्रीधरन भी इस बात को पूरी शिद्दत के साथ मानते और अनुसरण करते हैं। वह कहते हैं, ‘लोगों को कष्ट दिए बगैर तय समय और बजट में काम पूरा करने के लिए विजन और स्पष्ट ऑब्जेक्टिव होना बहुत जरूरी है। इसके बगैर सफलता की कल्पना नहीं की जा सकती।

सभी घटकों की भागीदारीश्रीधरन का कहना है, ‘हम इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि केवल सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही काफी नहीं है। पारदर्शिता, कार्यक्षमता, जवाबदेही, सर्विस-ओरिएंटेशन और सभी घटकों की सहभागिता भी उतनी ही महवपूर्ण है।’ इस बात को वह सिर्फ कहते ही नहीं, अमल में भी लाते हैं। उन्होंने अब तक के अपने सभी प्रोजेक्टों में उससे जुड़े सभी पक्षों की सहभागिता को सुनिश्चित किया है और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया है। यह भी उनकी कामयाबी का एक महत्त्वपूर्ण सूत्र है।

Narayan Murty ji ki aatmakatha.

#7.2 मैं एक साधारण इंसान हूं: नारायण मूर्ति

नारायण मूर्ति
मैं एक साधारण इंसान हूं: नारायण मूर्ति  और भी... 

इंफोसिस के चेयरमैन एन आर नारायण मूर्ति ने कंपनी के शेयरधारकों की वार्षिक सभा में अपना आखिरी भाषण दिया और अपने को एक सामान्य आदमी बताया.
वर्षों तक देश की इस दूसरी सबसे बड़ी साफ्वेयर सेवा निर्यातक कंपनी का नेतृत्व करने वाले मूर्ति ने अब अवकाश ले लिया है. उन्होंने कहा कि वह ‘बहुत से मामलों में औसत से कम योग्यता के’ एक साधारण इंसान है. मूर्ति ने कहा कि उनके जैसे व्यक्ति की सफलता से उन सामान्य लोगों को उत्साहित होना चाहिए जो दुनिया में कुछ कर दिखाना चाहते हैं.
इंफोसिस के संस्थापक सदस्य और मुख्य संरक्षक नारायण मूर्ति ने कहा कि अपनी पारी समाप्त करते हुए मैं देश और दुनिया में के लिए जो कुछ भी कर सका उसके लिए भगवान, परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों का शुक्रगुजार हूं. मेरे जैसा औसत से कम गुणों वाला व्यक्ति यह सब उनकी मदद से ही कर सका. देश में साफ्टवेयर उद्योग की पहचान नारायण मूर्ति ने कंपनी की 30वीं सालाना साधारण बैठक में कहा कि मेरी जीवन गाथा किसी भी सामान्य इंसान को प्ररित कर सकती है, जो देश और दुनिया में कुछ अलग करने की चाह रखता हो. उन्होंने कहा कि इंफोसिस की यात्रा उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा है.
मूर्ति ने कहा कि मेरे सहयोगी कहते हैं कि वह और इन्फोसि एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं. कंपनी के हर प्रमुख निर्णयों में मैं अब तक प्रथम पात्र रहा हूं. मैंने इसकी हर उपलब्धि का आनंद उठाया है और कंपनी के किसी भी गलत कदम पर सहानुभूति भी देता रहा हूं.

नारायण मूर्ति ग्लोबल स्तर पर भी उद्यमिता की अनुपम मूरत

दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति को भी आज के जमाने के 12 महानतम उद्यमियों में शुमार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'फॉच्र्यून' द्वारा जारी इस सूची में पहला स्थान जानी-मानी कंपनी एप्पल के दिवंगत प्रमुख स्टीव जॉब्स को दिया गया है।
इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स तथा फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हैं।

इन सभी उद्यमियों की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वे 'कांसेप्ट को कंपनी में तब्दील करने' तथा 'बिजनेस के स्वरूप को बदल देने' में कामयाब रहे हैं। इस अमेरिकी प्रकाशन ने कहा है कि इन्फोसिस के दूरदर्शी संस्थापक नारायण मूर्ति ने भारत की इस दिग्गज कंपनी को दुनिया के नक्शे पर ला खड़ा किया। 65 वर्षीय नारायण मूर्ति ने यह साबित कर दिया कि भारत भी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के कार्य में महारथ हासिल कर ग्लोबल स्तर पर मुकाबला कर सकता है जहां अब तक पश्चिमी देशों का ही प्रभुत्व रहा है।

फॉच्र्यून ने कहा कि इन्फोसिस के छह संस्थापकों में से एक और 21 वर्षों तक इसके सीईओ रहने वाले नारायण मूर्ति ने उस आउटसोर्सिंग क्रांति का बिगुल बजाने में मदद की जिससे  भारतीय अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर की संपत्ति आई तथा इसके साथ ही भारज दुनिया के बैक ऑफिस में तब्दील हो गया।

फॉच्र्यून ने उनके ही सबक का उदाहरण देते हुए कहा है कि जीरो से शुरुआत करने वाली किसी कंपनी को निश्चित रूप से चिरस्थायी वैल्यू सिस्टम वाले लोगों की एक टीम के साथ जुड़कर काम करना चाहिए। नारायण मूर्ति को 12 लोगों की इस फेहरिस्त में 10वां स्थान हासिल हुआ है। फॉच्र्यून ने मूर्ति को उद्धृत करते हुए कहा है कि आज बलिदान देने का वक्त है, फल की प्राप्ति तो कल होगी।

इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर स्टीव जॉब्स का नाम है जिन्हें फॉच्र्यून हमारी पीढ़ी का सबसे प्रखर उद्यमी मानती है। फॉच्र्यून ने उन्हें विजनरी, प्रेरक, ब्रिलियंट, बेहद सक्रिय जैसे विशेषणों से नवाजा है।

फॉच्र्यून ने कहा कि जॉब्स के बारे में सबसे आश्चर्यजनक तथ्य उनका यह विचार है कि मार्केट रिसर्च तथा फोकस ग्रुप्स ने इनोवेट करने की किसी व्यक्ति की क्षमता को केवल सीमित ही किया है, उसे विस्तारित नहीं किया। फॉच्र्यून ने कहा कि यह मानना शायद गलत नहीं होगा कि अगर जॉब्स ने कंज्यूमर रिसर्च पर बहुत अधिक भरोसा किया होता तो एप्पल का कोई भी बहुचर्चित प्रॉडक्ट मसलन आईपॉड, आईट्यून्स, आईफोन एवं आईपैड सामने नहीं आया होता।

इस फेहरिस्त में दूसरे स्थान पर बिल गेट्स है जो फॉच्र्यून के अनुसार ऐसे असाधारण उद्यमियों में से एक हैं जिन्हें अपने जीवन काल में दो बार दुनिया को बदलने का मौका मिला है। एक बार उन्होंने पर्सनल कंप्यूटर का आविष्कार कर एक क्रांति लाने में मदद की तथा अब वह दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी के रूप में ग्लोबल हेल्थ और पब्लिक एजुकेशन की चुनौतियों से जूझने में लगे हुए हैं।

फॉच्र्यून की फेहरिस्त में बांग्लादेश के अर्थशास्त्री एवं ग्रामीण बैंक के संस्थापक मुहम्मद युनूस का भी नाम शामिल है जिन्होंने अपनी संस्था के जरिये माइक्रोक्रेडिट के कांसेप्ट की शुरुआत की तथा उसे फैलाया। फॉच्र्यून ने कहा कि इस सूची में वैसे लोगों के नाम शामिल हैं जिनके पास दुनिया को बदलने की दृष्टि है।

Thursday, 12 July 2012

super 30 founder Anand kumar

Mathematician Anand Kumar transformed the heartbreak of his own unfulfilled academic dreams into inspiration for lifting up smart but disadvantaged young students like he once had been. Kumar’s school, “Super 30,” provides not only education but also food and shelter for students in Patna, India with the goal of helping them pass the entrance exam for the Indian Institute of Technology. His program is funded by tuition that more privileged students pay to attend a separate mathematics institute he founded in 1992, and he has received recognition from President Obama’s office and major Western media. With a small staff of only four teachers, Kumar over the past eight years has coached 212 of his 240 students to pass the exam. He says that he has been physically threatened by people who run similar training institutes in Patna, but he forges ahead with his small endeavor and hopes to admit more students in need to his program in the future. (Photo: Anand Kumar teaching his students, courtesy of Super 30.)

Sunday, 8 July 2012

[राम बालक राय ] जुलाई 08 2012 : समस्तीपुर चीनी मिल परिसर में यदि माल खुला तो होगा आन्दोलन .

[राम बालक राय ]  जुलाई 08 2012 : समस्तीपुर चीनी मिल परिसर में यदि माल खुला तो होगा आन्दोलन . उक्त  बाते राजद सुप्रीमो लालू यादव ने समस्तीपुर  जितवारपुर अस्तित समस्तीपुर कोल्एज परिसर के मैदान में कही। उन्होंने वह एक जनसभा को संबोधित करते हुइ कहा की मेरे शासनकल  में यह आरोप लगा की यहाँ की चीनी मिल बंद हो गयी लेकिन इसे हमने निजी तौर पर वायापरियो के हाथो नहीं बेचा /  अगर नितीश कुमार ने इसे बेचने का काम किया तो हम बर्दास्त नहीं करेंगे .आपको मै  बताने आया हु की यह क्षेत्र सामाजिक न्याय का क्षेत्र रहा है . यहाँ तीन  महीने के भीतर  तीस हत्याए हो  चुकी है  . यह सुशासन वाले बिहार के लिए महज एक उदहारण है . सरकार  पुलिस और प्रसाशन तथा मीडिया सब बेलगाम हो गया है . सुखा रहत बितरण के नाम पर सर्कार के मुलाजिमो ने खूब लूटा . फिर 200 करोर लूटने की योजना है . सचेत रहिये . उन्होंने कहा की सुशिल मोदी कहते है की लालू बुध हो गए है . हम तो युवाओ के बीच ही कम करेंगे।आधी से अधिक सीट हम युवाओ को देंगे . बिहार में गठबंधन से सवाल पर कहा की यह बेमेल शादी है . जल्द ही तलाक  हो जायेगा . देखो  भाई लोगन. उ प . चेत गया अब बिहार की   बारी  है. शिक्षको को ठेका पर बहल कर दिया . पैसा नहीं देता है . बिजली का रेट बढ़ा  दिया . एक सुई का कारखाना नहीं लगा . tet  के नाम पर  नौजवानों को ठगा जा रहा है . 36 लाख परीक्षा दिया एक लाख को पास किया . बाकि कागज फेक दिया .
संसद रघुबंश प्रसाद सिंह ने कहा की यह यात्रा ,जन आन्दोलन है . मिथिलांचल के लोगो की आवाज को बुलंद करने के लिए यह सुरु किया गया  है . हमने बिहार में तीन बिस्वविद्यालय खोलने की मांग सरकार  से की है . वैशाली में डीम्ड बिस्वबिद्यालय खोलने की मांग की है . मई कहता हु की जब बिहार बिकाश कर ही रहा है तो फिर बिशेस राज्य का दर्जा क्यों ? सभा को सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के अलावे संसद राम कृपाल यादव , राजनीती प्रसाद , राम दो भंडारी, पीताम्बर पासवान,बिधायक अख्तरुल इस्लाम  शाहीन ,दुर्गा प्रसाद सिंह . सुनील कुमार पुष्पम , अजय बुल्गानिन ,रोमा भारती आदि ने संबोधित किया .अध्यक्षता  जिला अध्यक्ष रामाश्रय सहनी  ने किया .

Friday, 6 July 2012

apradh nahi kiya , hoisle buland hai

यशवंत को जमानत: हौसला बुलंद है , अपराध नही किया है मैने

आज भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को जमानत मिल गई है. उन्‍हें साक्षी जोशी कापड़ी द्वारा दर्ज कराए गए मामले में कोर्ट ने जमानत दी है. इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी तथा उनकी दूसरी पत्‍नी व आईबीएन7 की एंकर साक्षी जोशी कापड़ी ने यशवंत के खिलाफ क्रमश: नोएडा के फेज टू तथा सेक्‍टर 49 थाने में अलग अलग मुकदमा दर्ज कराया था. तीस जून की दोपहर दर्ज कराए गए मामले में नोएडा पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए दो घंटे के भीतर ही यशवंत को गिरफ्तार कर लिया था.

साक्षी जोशी द्वारा दिए गए शिकायत पर सेक्‍टर 49 की पुलिस ने आईपीसी की धारा 294 तथा 7सीएलए के तहत मामला दर्ज किया था. बाद में परेशान करने की नीयत से पुलिस ने इसमें दो और धाराएं आईपीसी के तहत 509 तथा 72 आईटी एक्‍ट जोड़ दिया था. पुलिस ने अपनी तरफ से मामले को और ज्‍यादा लटकाने की कोशिश की परन्‍तु माननीय जज अनिल कुमार यादव ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका खारिज करने की मांग को अस्‍वीकार कर दिया. यशवंत की तरफ से बहस वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता शिखर ठकराल ने की.

अब विनोद कापड़ी वाले मामले में सुनवाई बीस जुलाई को होगी. पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 341, 386 और 506 के तहत मामला दर्ज किया है. हालां कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन पत्रकारों के पक्ष में यशवंत करपोरेट घरानों से उलझते और लड़ते रहे, वही पत्रकार साथी यशवंत के इस गाढे़ समय से बचते नजर आए. ऐसे जैसे कुछ हुआ ही न हो. तो कुछ लोग इस समय भी यशवंत को निपटाने में अपनी सारी ऊर्जा खर्च करते रहे. हालांकि वक्त किसी को नही बख्शता । यशवंत तो मात्र एक बहाना थें , पारंपरिक मीडिया यानी टीवी और प्रिंट ने न्यू मीडिया को टारगेट बना लिया है । यशवंत के पहले रांची से राजनामा डाट काम के संपादक मुकेश भारतीय के उपर भी १५ लाख रुपया मांगने का मुकदमा एक बिल्डर ने जिसने पायनियर अखबार की फ़्रेंचाईजी को अस्सी लाख रुपये मे विनोद सरावगी से  खरीदा था, उसने दर्ज करवाया था । कारण था मुकेश भारतीय के द्वारा आर टी आई से पायनियर केप्रसार संख्या तथा उसे सरकार से मिलने वाले विग्यापन के संबंध में जानकारी प्राप्त करना । यह पवन बजाज भाजपा का बडा नेता है तथा इधर हाल के दो सालों में अरबो रुपये कमाए है । बिल्डर का पत्रकारिता के क्षेत्र में दखल सिर्फ़ अपने काले कारनामे और कालेधन को बचाने के लिए होता है । यशवंत के उपर पतिपत्नी द्वारा अलगअलग झुठा मुकदमा करने का अर्थ साफ़ था । भडास की आवाज को दबाना । यशवंत के खिलाफ़ इस लडाई में वह सभी अखबार और टीवी चैनल शामिल हो गए है जिनके खिलाफ़ यशवंत हमेशा लिखते रहे हैं । हालांकि वेब मीडिया ने भी इसे चुनौती की तरह लिया है और हर प्रकार की लडाई लडने के लिए अपना इरादा पक्का कर चुका है । वेब मीडिया के क्षेत्र मे भी अगंभीर टाईप के लोगों का प्रवेश हो चुका है जो दावा तो पत्रकार होने का करते हैं , पत्रकारिता के संस्थानो की बडी बडी डिग्रिया दिखाते हैं परन्तु कहीं कोई उन्हे घास नही डालता है , वैसे लोगों के लिए यह मौका अच्छा लगा और उन्होने टीवी मीडिया की तारीफ़ शुरु कर दी ताकि कहीं स्टिंगर वगैरह बन जाए और भोजन भत्ते का जुगाड हो जाए । चलिए कम से कम जेल जाकर के भी यशवंत ने कुछ लोगो के भोजन भता की व्यवस्था तो कर दी । इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापडी ने एक नए लडके नुकेश चौरसिया के माध्यम से अपना इन्टरव्यूव वेब मीडिया पर प्रकाशित करवाया लेकिन विनोद कापडी का यह दाव उल्टा पड गया । इन्टरव्यूव से यह साफ़ हो गया कि मुकदमा गलत है तथा एस एस पी नोएडा प्रवीण कुमार ने झुठा मुकदमा दर्ज करवाने में मदद की । दोनो फ़सते नजर आए तो उस इन्टरव्यूव के क्लीप को वेब साईट से हटा दिया । यह गंदी हरकत मीडिया खबर नाम के एक पोर्टल ने की । लेकिन एक बार क्लीप यू ट्यूब पर अप लोड हो जाने के बाद यह जिम्मेवारी यू ट्यूब की बनती है कि जरुरत पडने पर उसे न्यायालय मे प्रस्तुत करे । यशवंत को टारगेट कर के वेब मीडिया को जो चुनौती परंपरागत मीडिया ने दी है , उसे अंजाम तक पहुचाना वेब मीडिया के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जरुरी है । जेल में रहने के बाद भी यशवंत का हौसला बुलंद है , उन्होने एक वरिष्ठ पत्रकार को मिलने पर बताया कि जब मैने कोई अपराध किया हीं नही है तो डरना क्या बुलंदी के साथ साथ यशवंत की मुस्कुराहट भी बता रही थी कि वे निकलने के बाद भी उसी तरह अपनी लडाई जारी रखेंगें ।